नगर विकास विभाग में किंग कम्पनी का कारनामा, 1.18 करोड़ की बैंक गारंटी का फर्जीवाड़ा, अभी तक कार्रवाई नहीं? कौन खेल कर रहा…

नगर परिषद दानापुर ने खुद खोली मेसर्स किंग सिक्योरिटी गार्डस प्राइवेट लिमिटेड की पोल, बैंक ने गारंटी जारी करने से किया इनकार; विशेष सचिव को पत्र भेजकर कानूनी कार्रवाई की मांग, अब मंत्री स्तर पर पैरवी की चर्चा
पटना/दानापुर। सरकारी निविदा हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल! रकम भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि करीब 1 करोड़ 18 लाख रुपये। हैरानी यह कि इस पूरे मामले में फर्जी बैंक गारंटी का खुलासा किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद नगर परिषद दानापुर निजामत के आधिकारिक पत्राचार से हुआ है। नगर परिषद ने संबंधित बैंक से सत्यापन कराया तो बैंक ने कथित बैंक गारंटी जारी करने से ही इनकार कर दिया। इसके बाद भी संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी निकाय के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार आखिर क्यों थम गई है?
मामला मेसर्स King Securities Guards Services Pvt. Ltd. से जुड़ा है। नगर परिषद दानापुर निजामत के कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से 16 अक्टूबर 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव को भेजे गए पत्र में इस पूरे प्रकरण का उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, नगर परिषद की निविदा संख्या NIT-07/2025-26 के तहत कंपनी की ओर से कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद दानापुर निजामत के पक्ष में 1,18,53,855 रुपये की बैंक गारंटी प्रस्तुत की गई थी।
बैंक ने गारंटी को बताया गैर-जारी और फर्जी
नगर परिषद के पत्र में बैंक गारंटी संख्या 209911LG015125 और 20 दिसंबर 2025 की तारीख का उल्लेख है। इस गारंटी की वास्तविकता की जांच के लिए संबंधित बैंक से संपर्क किया गया। पत्र में दर्ज बैंक के जवाब के मुताबिक, संबंधित बैंक गारंटी उसकी शाखा से जारी नहीं की गई थी। यानी जिस बैंक गारंटी के आधार पर निविदा प्रक्रिया में कंपनी ने अपनी वित्तीय विश्वसनीयता प्रदर्शित की, उसकी प्रामाणिकता पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए।
नगर परिषद ने इस संबंध में पहले भी पत्राचार किया था। पत्र में 10 मार्च 2026 के कार्यादेश तथा 10 सितंबर 2026 के पूर्व पत्र का भी संदर्भ दिया गया है। बैंक से प्राप्त जवाब के बाद मामले को गंभीर मानते हुए फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया है।
फर्जीवाड़े का खुलासा, फिर कार्रवाई किसके दबाव में रुकी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नगर परिषद के आधिकारिक पत्र में बैंक गारंटी की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल दर्ज हैं और बैंक की ओर से उसे जारी नहीं किए जाने की बात कही गई है, तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ? क्या निविदा और कार्यादेश की वैधता की जांच हुई? क्या कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने अथवा प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हुई?
मामले को लेकर यह चर्चा भी है कि संबंधित कंपनी मंत्री स्तर पर अपनी पैरवी कर रही है। यदि ऐसा है तो यह भी जांच का विषय है कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज गंभीर आरोपों के बावजूद कंपनी को राहत दिलाने की कोशिश कौन कर रहा है और किस आधार पर?
सरकारी खजाने और निविदा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल
बैंक गारंटी किसी भी सरकारी निविदा में वित्तीय सुरक्षा और जवाबदेही का महत्वपूर्ण आधार होती है। यदि कोई कंपनी फर्जी बैंक गारंटी के सहारे निविदा प्रक्रिया में शामिल होती है, तो यह केवल दस्तावेजी अनियमितता नहीं, बल्कि पूरी सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को चुनौती देने वाला मामला है।
नगर परिषद की ओर से विभाग को भेजे गए पत्र में संबंधित बैंक से प्राप्त सत्यापन के आलोक में आवश्यक कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। अब निगाहें नगर विकास एवं आवास विभाग पर हैं कि वह इस मामले में निष्पक्ष जांच कराता है या फिर फर्जी बैंक गारंटी के गंभीर आरोपों के बावजूद मामला फाइलों में ही दबा रह जाता है।
बड़ा सवाल : बैंक ने गारंटी जारी नहीं की, तो फिर कंपनी ने किस आधार पर इसे सरकारी निविदा में लगाया? और जब मामला सरकारी पत्र में दर्ज हो चुका है, तो कार्रवाई का आदेश कब निकलेगा?