जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग पर राज्य स्तरीय समीक्षा-सह-संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित

पटना, 19 अगस्त 2026। महिलाओं और बालिकाओं की आवश्यकताओं को योजनाओं एवं बजट में बेहतर स्थान देने तथा सरकारी योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का लैंगिक दृष्टिकोण से आकलन करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास निगम, समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार द्वारा जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग (GRB) पर राज्य स्तरीय समीक्षा-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन निगम के सभागार में किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. एन. विजय लक्ष्मी, अपर मुख्य सचिव, योजना एवं विकास विभाग, बिहार सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं तथा उन्होंने अध्यक्षीय संबोधन किया। इस अवसर पर श्रीमती रचना पाटिल, सचिव (व्यय), वित्त विभाग, बिहार सरकार, श्रीमती इनायत ख़ान, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम तथा श्री मनोज कुमार, निदेशक, Statistical Bureau, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास निगम से सुश्री मंजूषा चंद्रा, प्रशासी पदाधिकारी एवं श्रीमती मार्गण सिन्हा, उप सचिव-सह-नोडल पदाधिकारी की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. एन. विजय लक्ष्मी ने कहा कि जेंडर बजटिंग को केवल बजट में महिलाओं के लिए प्रावधान करने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि इसे महिलाओं के समग्र सशक्तीकरण और समावेशी विकास से जोड़कर देखने की जरूरत है। उन्होंने महिला कल्याण, महिला विकास एवं महिला उद्यमिता को इसके महत्वपूर्ण आयाम बताते हुए कहा कि सही दिशा में किए गए बजटीय प्रयास महिलाओं के जीवन में वास्तविक और सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने जिला एवं प्रखंड स्तर पर योजना निर्माण में महिलाओं की वास्तविक जरूरतों और प्राथमिकताओं को शामिल करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर योजनाएं बनाते समय महिलाओं की आवश्यकताओं एवं उनके समक्ष मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। उन्होंने महिलाओं द्वारा घर एवं परिवार के लिए किए जाने वाले अवैतनिक श्रम (Unpaid Labour) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योगदान अक्सर दिखाई नहीं देता, लेकिन परिवार और समाज के संचालन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में महिला कल्याण के साथ-साथ महिलाओं के विकास, आर्थिक सहभागिता और उद्यमिता को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
श्रीमती रचना पाटिल, सचिव (व्यय), वित्त विभाग, बिहार सरकार ने विशेष संबोधन में बजट निर्माण एवं वित्तीय प्रक्रियाओं में जेंडर दृष्टिकोण को शामिल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योजनाओं के परिणामों को केवल खर्च की गई राशि से नहीं, बल्कि महिलाओं एवं बालिकाओं पर पड़े वास्तविक प्रभाव के आधार पर भी देखा जाना चाहिए।
श्रीमती इनायत ख़ान, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम ने कहा, “जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग को प्रभावी बनाने के लिए योजनाओं के निर्माण से लेकर उनके क्रियान्वयन और मूल्यांकन तक जेंडर दृष्टिकोण को शामिल करना आवश्यक है। इसके लिए सभी योजनाओं में Sex-Disaggregated Data का नियमित संधारण एवं विश्लेषण सुनिश्चित किया जाना चाहिए। योजनावार महिला एवं पुरुष लाभार्थियों के पृथक आंकड़ों के आधार पर ही योजनाओं के जेंडर प्रभाव का बेहतर आकलन किया जा सकेगा और Gender-Responsive Planning एवं Budgeting को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।”
इस अवसर पर श्री मनोज कुमार, निदेशक, Statistical Bureau, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने कहा, “जेंडर बजटिंग को प्रभावी बनाने के लिए इसे विभागों की नियमित योजना एवं बजट प्रक्रिया का हिस्सा बनाना आवश्यक है। इसके लिए Gender Budget Cells को सुदृढ़ करने, विभागीय पदाधिकारियों की क्षमता बढ़ाने तथा gender-disaggregated data और gender analysis के बेहतर उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे बजटीय प्रावधानों को महिलाओं और बालिकाओं की वास्तविक जरूरतों तथा अपेक्षित परिणामों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा।”
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में बिहार सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं विषय-विशेषज्ञों द्वारा जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग के विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतियां दी गईं। डॉ. बार्ना गांगुली, Faculty, Bihar Institute of Public Finance and Policy (BIPFP), Department of Finance, Government of Bihar ने Outcome Budgeting, Sustainable Development Goals (SDGs) और Gender Budgeting के बीच समन्वय पर तकनीकी जानकारी साझा की।
वहीं, UN Women के तकनीकी विशेषज्ञों ने जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अनुभव और तकनीकी दृष्टिकोण साझा किए।
कार्यशाला के दौरान विभागीय योजनाओं एवं बजट में लैंगिक दृष्टिकोण को शामिल करने, महिलाओं एवं बालिकाओं पर बजट के प्रभाव को समझने, Sex-Disaggregated Data के उपयोग, योजनाओं के परिणामों के आकलन तथा जेंडर बजटिंग को विकेंद्रीकृत योजना निर्माण से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई।
कार्यक्रम में बिहार सरकार के विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी, महिला एवं बाल विकास निगम के अधिकारी, UN Women के तकनीकी विशेषज्ञ एवं विषय-विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला के माध्यम से बिहार में जेंडर-रिस्पॉन्सिव बजटिंग को अधिक प्रभावी, परिणामोन्मुखी एवं व्यवहारिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार सामने आए।