रविवार, 6 सितम्बर 2026
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हरियाणा में संघ और भाजपा का नया सामाजिक समीकरण: दलित मतों का विभाजन और सर्वसमावेशी हिंदू पहचान का निर्माण

हरियाणा की राजनीति में एक सूक्ष्म लेकिन गहरा सामाजिक-राजनीतिक परिवर्तन आकार ले रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में एक नई राजनीतिक बिसात बिछा रही है, जिसका मूल आधार “दलित वोटों के विभाजन के साथ-साथ एक व्यापक हिंदू पहचान का निर्माण” है।

Biru Valmiki

कुरुक्षेत्र और करनाल की हालिया घटनाएं तथा भाजपा का सामाजिक इंजीनियरिंग मॉडल लोकनीति के इस नए आयाम को बखूबी स्पष्ट करते हैं।

करनाल घटना और प्रतीकवाद का नया व्याकरण

कर्नाल में 25 वर्षीय बीरू वाल्मीकि की हत्या के बाद आयोजित श्रद्धांजलि सभा में गूंजते नारे—“जय भीम, जय वाल्मीकि, जय श्री राम”—राजनीतिक और सामाजिक चेतना के नए समायोजन का संकेत देते हैं।

  • प्रशासनिक त्वरितता: हत्या के महज कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस मुठभेड़ में रोड़ (ऊपरी जाति) समुदाय के दो आरोपियों का मारा जाना, पुलिस प्रशासन की उस पुरानी कार्यशैली से भिन्न था जो हिसार जैसे मामलों में देरी के लिए जानी जाती थी।
  • सामुदायिक एकजुटता: वाल्मीकि समाज के इस विरोध प्रदर्शन में हिंदू रक्षा दल के सदस्यों का साथ खड़ा होना यह दर्शाता है कि ‘दलित स्वाभिमान’ और ‘व्यापक हिंदू अस्मिता’ को अब परस्पर विरोधी के रूप में नहीं प्रस्तुत किया जा रहा है।

सामाजिक ध्रुवीकरण: गैर-जाट गोलबंदी और वंचित जातियों का उभार

पारंपरिक रूप से हरियाणा की राजनीति जाट-केंद्रित रही है। हालांकि, 2014 में मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व के बाद से भाजपा ने गैर-जाट आबादी और गैर-प्रभावी दलित समुदायों को साधने की रणनीति बनाई, जिसे वर्तमान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी आगे बढ़ा रहे हैं।

हरियाणा की कुल आबादी में अनुसूचित जातियों (SC) की हिस्सेदारी लगभग 20% है:

  • जाटव (Jatavs): यह दलितों में सबसे बड़ा और संगठित समूह है, जिसका झुकाव ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस या बीएसपी की ओर रहा है।
  • अन्य अनुसूचित जातियाँ (Non-Jatav SCs): इसमें वाल्मीकि, धानक, मजहबी सिख और खटीक जैसी जातियाँ आती हैं।

चुनावी आंकड़े (Lokniti-CSDS): 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद के आंकड़े बताते हैं कि जाटव समाज का 50% वोट कांग्रेस को मिला, जबकि अन्य दलित समुदायों (Non-Jatav SCs) का 45% वोट भाजपा के खाते में गया। भाजपा का चुनावी ढांचा इसी अंतर को साधकर बढ़त हासिल करने पर आधारित है।

नीतिगत हस्तक्षेप: उप-वर्गीकरण (SC Sub-classification) और कोटा

अगस्त 2024 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण की अनुमति दिए जाने के बाद, हरियाणा इसे लागू करने वाला पहला राज्य बना:

  • वंचित अनुसूचित जाति (DSC): 20% SC कोटे में से 10% आरक्षण वाल्मीकि, धानक, मजहबी सिख जैसी 36 पिछड़ी दलित जातियों के लिए तय किया गया।
  • अन्य अनुसूचित जाति (OSC): शेष 10% कोटा जाटव और चर्मकार समुदायों के लिए रखा गया।

प्रशासनिक स्तर पर ग्रुप-D के 7,596 पदों की भर्ती में से 605 पद DSC और 604 पद OSC के लिए विभाजित किए गए, जो वंचित जातियों को सीधे नीतिगत लाभ पहुँचाने की कोशिश है।

वैचारिक आधार: आरएसएस का समावेशी ढांचा

भाजपा की यह सामाजिक रणनीति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के उस विचार के अनुरूप है, जहाँ जातियों के आंतरिक भेदों को समाप्त कर एक एकीकृत हिंदू समाज की बात की जाती है।

  • सांस्कृतिक और वैचारिक समावेश: जैसा कि समाजशास्त्रीय अध्ययन बताते हैं, जहाँ एक तरफ बहुजन आंदोलन ने ब्राह्मणवादी व्यवस्था से दूरी बनाकर बौद्ध धर्म की ओर रुख किया, वहीं वाल्मीकि समुदाय अपनी विशिष्ट पहचान को रामायण और हिंदू सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ जोड़कर भी देखता है।
  • नया पहचान-निर्माण: भाजपा इसी सांस्कृतिक बिंदु पर काम कर रही है। वह अम्बेडकरवादी चेतना (‘जय भीम’), सामुदायिक स्वाभिमान (‘जय वाल्मीकि’) और वृहद धार्मिक पहचान (‘जय श्री राम’) को एक ही राजनीतिक छतरी के नीचे ला रही है।

हरियाणा की लोकनीति में भाजपा तीन अलग-अलग धाराओं को जोड़ने का प्रयास कर रही है—अम्बेडकरवादी अधिकार-चेतना, वंचित जातियों का आत्म-सम्मान और एक व्यापक हिंदू पहचान। वंचित दलित वर्गों को शासन-प्रशासन में हिस्सेदारी देकर और उन्हें वृहद धार्मिक अस्मिता का हिस्सा बनाकर चुनावी बढ़त हासिल करने का यह मॉडल कितना टिकाऊ होगा या यह दलित राजनीति में अंतर-सामुदायिक विभाजन को बढ़ाएगा, यह आने वाले समय की लोकनीति तय करेगी।

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