जगत गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने किया डॉ. रजनीश कांत की पुस्तक ‘राजनीश कांत मेथड’ का विमोचन

पटना। फिजियोथेरेपिस्ट, ऑस्टियोपैथ और काइरोप्रैक्टर डॉ. रजनीश कांत की पुस्तक ‘राजनीश कांत मेथड (आरकेएम)’ का विमोचन होटल पाटलिपुत्रा एग्ज़ोटिका, एक्ज़िबिशन रोड में जगत गुरु महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने किया। इस अवसर पर पुस्तक के लेखक डॉ. रजनीश कांत और फिल्म अभिनेता जय सिंह राठौड़ भी मौजूद रहे। टीएस पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक में काइरोप्रैक्टिक पद्धति, रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और दर्द से जुड़ी समस्याओं की देखभाल के बारे में सरल भाषा में जानकारी दी गई है।
मौके पर जगत महामंडलेश्वर हिमांगी सखी ने पुस्तक और डॉ. रजनीश कांत के कार्यों की सराहना की। हिमांगी सखी ने कहा कि डॉक्टर का काम लोगों को स्वस्थ और बेहतर जीवन देने का प्रयास करना है। आपको बता दें कि पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं। इनमें काइरोप्रैक्टिक देखभाल की बुनियाद, क्लिनिकल अवलोकन, खिलाड़ियों और बुजुर्गों की देखभाल, रीढ़ की हड्डी का स्वास्थ्य, इससे जुड़ी गलत धारणाएं, मरीजों को जागरूक करना और स्वयं की देखभाल जैसे विषय शामिल हैं। इसके साथ ही आरकेएम पद्धति, क्लिनिक संचालन और अन्य विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने की जानकारी भी दी गई है।
डॉ. रजनीश कांत ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल दर्द का उपचार करना नहीं, बल्कि लोगों को दर्द के साथ जीने की मजबूरी से बाहर निकालना है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से लोगों को इस पद्धति की बुनियादी जानकारी देने और जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया है। हमारा उद्देश्य केवल दर्द का उपचार करना नहीं है।
उन्होंने कहा कि डॉक्टर का काम उपचार करना है। जब कोई डॉक्टर उपचार करता है, तो वह मरीज की शारीरिक और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास करता है। उपचार के दौरान मरीज की मानसिक स्थिति का भी ध्यान रखा जाता है। डॉक्टर का काम लोगों को स्वस्थ करना और उन्हें बेहतर जीवन देना है। इसलिए डॉक्टर के कार्यों का सम्मान किया जाना चाहिए। डॉ. कांत ने कहा कि आने वाले संस्करण में वे अपनी व्यक्तिगत तकनीक के बारे में और विस्तार से जानकारी देने की योजना रखते हैं। गौरतलब है कि कुंभ के दौरान भी डॉ. कांत ने शिविर लगाकर साधु-संतों का उपचार किया था।