बिहार नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू, जानें क्या-क्या बदला

विशेष संवाददाता | लोकनीति डेस्क
बिहार के शहरी इलाकों में नागरिक सुविधाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। ‘बिहार नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ के जरिए ‘बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007’ में व्यापक संशोधन किए गए हैं। माननीय राज्यपाल द्वारा 27 अक्टूबर 2026 को प्रख्यापित इस अध्यादेश का आधिकारिक गजट प्रकाशन 29 अक्टूबर 2026 को कर दिया गया है।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य नगर निकायों के कामकाज में आ रही प्रशासनिक अड़चनों को दूर करना और शहरी क्षेत्रों में ‘ईज़ ऑफ़ लिविंग’ (जीवन को सुगम बनाना) के दायरे को और व्यापक करना है।
1. प्रशासनिक ढांचे और अधिकारों का स्पष्ट निर्धारण
अध्यादेश के तहत नगर निकायों के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को धारदार बनाया गया है:
- मुख्य पार्षद और स्थायी समिति: मुख्य पार्षद एवं सशक्त स्थायी समिति की भूमिकाओं और कार्यक्षेत्र को अधिक स्पष्ट किया गया है।
- कार्यकारी पदाधिकारी की भूमिका: मुख्य नगरपालिका पदाधिकारी की प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों को सटीक रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे विकास कार्यों की गति तेज हो सके।
- निगरानी तंत्र: निकायों के भीतर वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की जाँच तथा निगरानी की व्यवस्था को पहले से अधिक कड़ा किया गया है।
2. विज्ञापन व्यवस्था में बदलाव और सुरक्षा मानक
शहरी अवसंरचना और राजस्व व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए विज्ञापन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है:
- पारंपरिक विज्ञापन कर (Tax) व्यवस्था को अब विधिसम्मत शुल्क (Fee) व्यवस्था में बदल दिया गया है।
- सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापनों के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ा पालन और नियमों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई के प्रावधान जोड़े गए हैं।
3. डिजिटल और सरल भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया
आम नागरिकों और बिल्डर्स को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाने के लिए नियमों का आधुनिकीकरण किया गया है:
- ऑनलाइन अप्रूवल: भवन निर्माण नक्शा पास कराने की पूरी प्रक्रिया को अब पूरी तरह डिजिटल और सरल बना दिया गया है।
- आर्किटेक्ट्स का डिजिटल पंजीकरण: प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए आर्किटेक्ट्स के डिजिटल रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की गई है।
- व्यापारिक लाइसेंस: व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन के लिए लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है।
सरकार के इन नीतिगत सुधारों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में बिहार के नगर निकायों का कामकाज अधिक डिजिटल, पारदर्शी और जन-उन्मुख होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।