गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026
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जलवायु समर्थ स्वास्थ्य प्रणाली में आयुष की भूमिका पर पटना में राज्य स्तरीय कार्यशाला

बिहार के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के 50 प्रतिभागी शामिल; महिलाओं के नेतृत्व में सामुदायिक पहल को सरकारी जलवायु-स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ने की माँग
पटना, 29 सितंबर 2026। घोघरडीहा प्रखंड स्वराज्य विकास संघ (जी.पी.एस.वी.एस.), मधुबनी द्वारा आज ए. एन. सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान (अनुग्रह नारायण सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान), पटना में “जलवायु समर्थ स्वास्थ्य प्रणाली (सी.आर.एच.एस.) को मुख्यधारा में लाने में आयुष की भूमिका” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का केंद्र बिहार में जलवायु-समर्थ स्वास्थ्य प्रणाली हेतु महिलाओं के नेतृत्व में सामुदायिक पहल रहा। इसमें बिहार के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के 50 प्रतिभागियों के साथ आयुर्वेद विशेषज्ञ, चिकित्सक और राज्य आयुष समिति के प्रतिनिधि शामिल हुए। आयुष से आशय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा एवं होम्योपैथी से है।
संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश कुमार ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा, “बाढ़, लू और मच्छर से फैलने वाली बीमारियाँ बिहार के गाँवों में हर साल बढ़ रही हैं। महिलाओं की अगुवाई में समुदाय, पंचायत और स्वास्थ्य कार्यकर्ता मिलकर काम करें और आयुष की पारंपरिक समझ को इससे जोड़ा जाए, तो गाँव इन खतरों का मजबूती से सामना कर सकते हैं।” दीप प्रज्वलन के साथ उद्घाटन सत्र में डॉ. धनंजय शर्मा (राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, राज्य आयुष समिति, बिहार), डॉ. शिव मंगल मिश्र (उप निदेशक, आयुष, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार, सेवानिवृत्त), डॉ. अशोक दुबे, डॉ. शिवादित्य ठाकुर, डॉ. (प्रो.) कुमारी उमा पाण्डेय, डॉ. उषा मिश्रा और डॉ. रोहित सहित अतिथियों का सम्मान किया गया।
पहले तकनीकी सत्र में डॉ. अजय कुमार झा एवं श्री प्रशांत कुमार सिंह ने जी.पी.एस.वी.एस. का अनुभव साझा किया। संस्था बिहार के 8 जिलों — मधुबनी, दरभंगा, सुपौल, पटना, नालंदा, भोजपुर, वैशाली और सारण — के 100 गाँवों में यह पहल चला रही है, जो अब तीसरे वर्ष में है। वर्ष 2026 में 490 परिवारों के सर्वेक्षण में 90% से अधिक परिवारों ने बीमारियाँ बढ़ने, लगभग 80% ने गर्मी और लू से परेशानी तथा लगभग 61% ने मलेरिया-डेंगू जैसी बीमारियों से प्रभावित होने की बात कही। डॉ. (प्रो.) कुमारी उमा पाण्डेय (प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना) ने आयुष में महिलाओं की भूमिका, डॉ. रोहित ने ऋतुचर्या के माध्यम से मौसमी रोगों से बचाव और डॉ. धनंजय शर्मा ने बेहतर स्वास्थ्य हेतु बिहार में आयुष मिशन की भूमिका पर विचार रखे।
दूसरे तकनीकी सत्र में डॉ. शिवादित्य ठाकुर (अधीक्षक, राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना) ने डेंगू-मलेरिया जैसे जलवायु-संवेदी रोगों के लिए आयुर्वेदिक अस्पतालों की तैयारी, डॉ. अशोक दुबे ने जलवायु व प्रदूषण-जनित रोगों, डॉ. उषा मिश्रा ने महिला, बाल व किशोर स्वास्थ्य में आयुर्वेद की महत्ता तथा डॉ. शिव मंगल मिश्र ने आयुर्वेद एवं संपूर्ण स्वास्थ्य (एक स्वास्थ्य अवधारणा) पर बात की।
श्री दीपक शर्मा एवं श्री रमेश कुमार की अध्यक्षता में हुए भोजनोपरांत सत्र में जन साहस फाउंडेशन की राज्य समन्वयक श्रीमती प्रियंका कुमारी एवं श्री दीपायन ने जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में श्रमिकों के व्यावसायिक और आजीविका स्वास्थ्य पर चर्चा की। कार्यशाला में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में अत्यधिक गर्मी से देश में 247 अरब संभावित श्रम-घंटों का नुकसान हुआ। डॉ. एस. एन. ठाकुर (मानव संसाधन प्रबंधक, बैद्यनाथ, पटना) ने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से स्वयंसेवी संगठनों के लिए संसाधन जुटाने की जानकारी दी। श्री आनंद कुमार एवं श्री अभिषेक आनंद के संचालन में खुली चर्चा हुई।
कार्यशाला में सरकार से प्रमुख माँगें
आयुष को राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम और बिहार की राज्य कार्ययोजना में शामिल किया जाए।
गाँव स्तर के मॉडल को ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समिति तथा समुदाय-आधारित आपदा जोखिम कमी योजनाओं से जोड़ा जाए।
हर मौसम से पहले लू, मलेरिया और डेंगू से बचाव के जागरूकता अभियान नियमित रूप से चलें।
श्री अरुण कुमार एवं श्री सुनील कुमार (जी.पी.एस.वी.एस.) ने आगे की राह प्रस्तुत की और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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