गुरूवार, 22 अक्टूबर 2026
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बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का पुराना वीडियो वायरल: नौकरशाही के रवैये और लोकतांत्रिक जवाबदेही पर उठे सवाल

पटना:

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का एक पुराना कार्यालयी वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल होने के बाद नौकरशाही (Bureaucracy) के व्यवहार और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

वायरल वीडियो में मुख्य सचिव हाथ में कुछ दस्तावेज लिए बातचीत करते और इशारे करते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि बातचीत के दौरान उनका रुख वहां मौजूद लोगों के प्रति सख्त और कथित तौर पर असम्मानजनक था। इस वीडियो के सामने आने के बाद यह सवाल एक बार फिर गहरा गया है कि जब जनप्रतिनिधि या आम नागरिक अपने क्षेत्र की समस्याएं लेकर उच्च अधिकारियों के पास पहुंचते हैं, तो उनके साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए?

हालाँकि, यह वीडियो किस संदर्भ में और किन परिस्थितियों में रिकॉर्ड किया गया था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए केवल एक छोटे से वीडियो क्लिप के आधार पर किसी अधिकारी के पूरे रवैये या मंशा का अंतिम मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा।

प्रशासनिक बैठकों और संवेदनशीलता पर उठते सवाल

यह मामला इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि अगस्त 2026 में बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर की मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत से मुलाकात काफी चर्चा में रही थी। उस समय मुख्य सचिव कार्यालय को औपचारिक स्पष्टीकरण जारी कर बताना पड़ा था कि यह मुलाकात पूर्व निर्धारित प्रक्रिया और समय सीमा के तहत हुई थी।

दूसरी ओर, खुद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने जनवरी 2026 में राज्य के सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए थे कि सरकारी दफ्तरों में अपनी फरियाद लेकर आने वाले नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुना जाए और किसी को अधिकारियों के न मिलने जैसी परेशानी का सामना न करना पड़े।

संवेदनशीलता और मानक आचार संहिता की जरूरत

लोकनीति और सुशासन (Good Governance) के सिद्धांतों के अनुसार, प्रशासनिक व्यवस्था में ‘जन-केन्द्रित दृष्टिकोण’ (People-Centric Approach) सबसे महत्वपूर्ण होता है।

  • पब्लिक सर्वेंट का पद: आईएएस (IAS) अधिकारी जनता के सेवक होते हैं। उनका पद केवल प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के प्रति सहानभूति और शिष्टाचार प्रदर्शित करने के लिए भी जवाबदेह है।
  • संवाद का तरीका: अधिकारियों का शारीरिक हाव-भाव (Body Language) और भाषा का चयन यह तय करता है कि जनता का शासन पर कितना भरोसा है। रूखा या सख्त रवैया अक्सर व्यवस्था और नागरिक के बीच की दूरी को बढ़ा देता है।

क्या सरकारी दफ्तरों में जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से बातचीत के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए एक पारदर्शी ‘कोड ऑफ कंडक्ट’ (मानक आचार संहिता) लागू होना चाहिए?

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